बिजली सखी योजना : जानिए सच्चाई वाराणसी में क्यों नहीं पहुंच रही सखियां?

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क्या वाराणसी में बिजली सखी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित है? बिजली सखी योजना उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण इलाकों में बिजली सेवाओं को बेहतर करने का एक शानदार प्रयास है। लेकिन वाराणसी में इस योजना के साथ क्या हो रहा है? लोग कह रहे हैं कि सखियां घरों तक नहीं पहुंच रही हैं और पावर स्टेशन पर ही बैठी हैं। आइए, इस योजना का असली सच जानते हैं और समझते हैं कि आखिर दिक्कत कहां है।

बिजली सखी योजना क्या है?

बिजली सखी योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक पहल है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को बिजली बिल वसूली और मीटर रीडिंग जैसे कामों में शामिल किया जाता है। इसका मकसद है महिलाओं को रोजगार देना और गांवों में बिजली सेवाओं को पारदर्शी बनाना। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे बिजली विभाग के साथ मिलकर काम कर सकें। यह योजना न सिर्फ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पहुंच को भी बेहतर करने का दावा करती है।

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वाराणसी में क्या है समस्या?

वाराणसी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, वहां बिजली सखी योजना की हकीकत कुछ और ही बयान करती है। लोगों का कहना है कि सखियां घरों तक नहीं पहुंच रही हैं। कई गांवों में बिजली बिल वसूली और मीटर रीडिंग का काम पहले जैसा ही चल रहा है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि सखियां पावर स्टेशन पर ही रहती हैं और गांवों में नियमित रूप से नहीं आतीं। इससे बिजली बिल समय पर जमा नहीं हो पा रहे, और लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

हाल के एक सर्वे में पाया गया कि वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 30% सखियां ही नियमित रूप से अपने काम को अंजाम दे रही हैं। बाकी या तो प्रशिक्षण की कमी के कारण सक्रिय नहीं हैं या फिर उन्हें सही संसाधन नहीं मिल रहे। इसके अलावा, कुछ सखियों ने शिकायत की कि उन्हें समय पर भुगतान नहीं हो रहा, जिसके कारण वे काम करने में रुचि नहीं ले रही हैं।

बिजली सखी योजना क्यों रुक रही है योजना की रफ्तार?

1. प्रशिक्षण की कमी: कई सखियों को पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं किया गया। मीटर रीडिंग और बिल वसूली जैसे कामों के लिए तकनीकी जानकारी जरूरी है, जो सभी को नहीं मिली।

2. संसाधनों का अभाव: सखियों को गांवों में जाने के लिए सही परिवहन सुविधा या उपकरण नहीं दिए गए। इससे वे दूरदराज के इलाकों में नहीं पहुंच पातीं।

3. जागरूकता की कमी: कई ग्रामीणों को इस योजना के बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है। उन्हें नहीं पता कि सखियां कौन हैं और उनका काम क्या है।

4. बिजली विभाग की लापरवाही: कुछ मामलों में बिजली विभाग का सहयोग कमजोर रहा है। सखियों को सही दिशा-निर्देश और समर्थन नहीं मिल रहा।

बिजली सखी योजना का लाभ कैसे लें?

अगर आप वाराणसी में रहते हैं और इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो सखी बनने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

(1)आवेदन पत्र प्राप्त करें: नजदीकी बिजली विभाग कार्यालय या ग्राम पंचायत से आवेदन पत्र लें।

(2)दस्तावेज जमा करें: आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, और शैक्षिक योग्यता के दस्तावेज तैयार रखें।

(3)प्रशिक्षण में शामिल हों: बिजली विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा लें।

(4)पंजीकरण पूरा करें: सभी दस्तावेज जमा करने के बाद पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें।

(5)काम शुरू करें: प्रशिक्षण के बाद आपको बिल वसूली और मीटर रीडिंग का काम सौंपा जाएगा।

समाधान के लिए क्या किया जा सकता है?

बिजली सखी योजना को सफल बनाने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। सबसे पहले, सखियों को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। बिजली विभाग को चाहिए कि वह सखियों के साथ नियमित रूप से बैठक कर उनकी समस्याएं सुने। साथ ही, ग्रामीणों को इस योजना के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए। अगर सखियों को समय पर भुगतान और परिवहन सुविधा मिले, तो वे गांवों तक आसानी से पहुंच सकेंगी।

लोगों का क्या कहना है?

वाराणसी के एक ग्रामीण रामू यादव कहते हैं, “हमें तो सखी के बारे में ज्यादा पता ही नहीं। बिजली बिल के लिए अभी भी पुराने कर्मचारी आते हैं।” वहीं, एक सखी राधा देवी ने बताया, “हमें ट्रेनिंग तो दी गई, लेकिन गांवों तक जाने के लिए साधन नहीं हैं। ऊपर से पैसे भी देर से मिलते हैं।”

निष्कर्ष:

बिजली सखी योजना में बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन वाराणसी में इसे लागू करने में कई खामियां नजर आ रही हैं। अगर सरकार और बिजली विभाग इस योजना पर ध्यान दें, तो न सिर्फ ग्रामीण महिलाएं सशक्त होंगी, बल्कि बिजली सेवाएं भी बेहतर होंगी। सखियों को सही संसाधन, समय पर भुगतान, और ग्रामीणों को जागरूकता देकर इस योजना को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। अगर आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं या इसका लाभ उठाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी बिजली विभाग से संपर्क करें और बदलाव का हिस्सा बनें।

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(1) बिजली सखी का वेतन कितना है?

बिजली सखी योजना के तहत महिलाएं प्रति माह 8,000 से 10,000 रुपये कमा सकती हैं। प्रत्येक बिल पर 20 रुपये और 2,000 रुपये से अधिक बिल पर 1% कमीशन मिलता है। कुछ मामलों में 50,000 रुपये तक कमाई संभव है।

(2) विद्युत सखी का क्या काम होता है?

विद्युत सखी ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह करती हैं। वे मीटर रीडिंग और ऑनलाइन बिल भुगतान में मदद करती हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर, वे डिजिटल भुगतान उपकरणों का उपयोग करती हैं, जिससे ग्रामीणों को सुविधा मिलती है।

(3) बिजली सखी योजना किस राज्य में लांच हुई है?

बिजली सखी योजना उत्तर प्रदेश में शुरू हुई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देना और बिजली बिल संग्रह को आसान बनाना है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मई 2020 में लांच की गई थी।

(4) बिजली सखी योजना का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करे?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए www.upsrlm.org पर जाएं। स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाएं आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र संलग्न करें। ऑफलाइन आवेदन के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से संपर्क करें।

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