स्वदेश दर्शन योजना:क्या आप जानते हैं कि बिहार की धरती न सिर्फ बौद्ध धर्म का केंद्र है, बल्कि जैन धर्म के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? स्वदेश दर्शन योजना के तहत जैन तीर्थंकर परिपथ का विकास हो रहा है, जो बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह योजना न केवल धार्मिक स्थलों को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी लाएगी। आइए, जानते हैं कि किन शहरों में यह परिपथ विकसित होगा और बिहार के पर्यटन को इससे कैसे फायदा होगा।
स्वदेश दर्शन योजना क्या है?
स्वदेश दर्शन योजना भारत सरकार की एक खास पहल है, जो 2014-15 में शुरू हुई थी। इसका मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों में थीम आधारित पर्यटन सर्किट को विकसित करना है। जैन तीर्थंकर परिपथ भी इन्हीं में से एक है, जो जैन धर्म के तीर्थंकरों की शिक्षाओं और उनके जीवन से जुड़े स्थानों को जोड़ता है। इस योजना के तहत बिहार के उन शहरों को चुना गया है, जहां जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। यह न सिर्फ धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि बिहार की संस्कृति और विरासत को भी दुनिया के सामने लाएगा।
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बिहार में जैन तीर्थंकर परिपथ के लिए चुने गए शहर
बिहार जैन धर्म के लिए बेहद खास है, क्योंकि यह भगवान महावीर की जन्मस्थली है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत निम्नलिखित शहरों को जैन तीर्थंकर परिपथ के विकास के लिए चुना गया है:
(1)पावापुरी: यह वह पवित्र स्थान है जहां भगवान महावीर ने 527 ईसा पूर्व में निर्वाण प्राप्त किया था। यहां का जल मंदिर और कमल के आकार का मंदिर पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है।
(2)कुंदलपुर: यह स्थान नालंदा के पास है और जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुसार यहीं भगवान महावीर का जन्म हुआ था। यहां कई प्राचीन जैन मंदिर हैं।
(3)लछवाड़: यह भगवान महावीर की जन्मस्थली के रूप में माना जाता है। यहां 1874 में बना जैन मंदिर और 2600 साल पुरानी महावीर की मूर्ति पर्यटकों को आकर्षित करती है।
(4)राजगीर: यह ऐतिहासिक शहर जैन धर्म के लिए महत्वपूर्ण है। यहां कई जैन मंदिर और तीर्थंकरों से जुड़े स्थान हैं, जो पर्यटकों के लिए खास हैं।
नोट- इन शहरों में सड़क, होटल, रेस्ट हाउस और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले।
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बिहार के पर्यटन को कैसे मिलेगा बढ़ावा?
जैन तीर्थंकर परिपथ के विकास से बिहार में पर्यटन को कई तरह से फायदा होगा। सबसे पहले, यह धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जो जैन धर्म के इतिहास और संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं। 2025 में बिहार में 2.37 करोड़ पर्यटकों ने दौरा किया, जिसमें 30 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस परिपथ के विकसित होने से यह संख्या और बढ़ेगी।
दूसरा, यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। नए होटल, रेस्तरां, गाइड और परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। तीसरा, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा। जैन मंदिरों और तीर्थ स्थलों की खूबसूरती दुनिया भर में फैलेगी।
स्वदेश दर्शन योजना में आवेदन कैसे करें?
अगर आप इस योजना का हिस्सा बनना चाहते हैं, जैसे कि पर्यटन से जुड़ा कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या फंडिंग के लिए आवेदन करना, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:
- स्वदेश दर्शन योजना की वेबसाइट (swadeshdarshan.gov.in) पर लॉग इन करें।
- पर्यटन प्रोजेक्ट का विस्तृत प्लान बनाएं, जिसमें बजट और सुविधाओं का ब्यौरा हो।
- प्रोजेक्ट को राज्य पर्यटन विभाग के जरिए मंजूरी के लिए भेजें।
- जरूरी दस्तावेज जैसे प्रोजेक्ट रिपोर्ट, फंड उपयोग का प्लान और अन्य कागजात जमा करें।
- मंत्रालय द्वारा प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद फंडिंग दी जाएगी
स्थानीय लोगों के लिए फायदे
स्वदेश दर्शन योजना से स्थानीय लोगों को कई तरह से फायदा होगा। होमस्टे शुरू करने का मौका मिलेगा, जिससे अतिरिक्त कमाई हो सकती है। साथ ही, स्थानीय हस्तशिल्प और खान-पान को बढ़ावा मिलेगा। स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए लोगों को गाइड, हॉस्पिटैलिटी और हाइजीन की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इससे नौजवानों को रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, इस योजना को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे कि सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी। लेकिन सरकार स्वच्छ भारत अभियान और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि ये समस्याएं हल हो सकें। पर्यटकों के लिए साफ-सफाई और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है
निष्कर्ष:
स्वदेश दर्शन योजना के तहत जैन तीर्थंकर परिपथ का विकास बिहार के पर्यटन को नई दिशा देगा। पावापुरी, कुंदलपुर, लछवाड़ और राजगीर जैसे शहर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि ये बिहार की समृद्ध संस्कृति को भी दर्शाते हैं। इस योजना से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। अगर आप बिहार की इस खूबसूरत यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इन शहरों की सैर जरूर करें और स्वदेश दर्शन योजना के तहत शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लें। बिहार का पर्यटन अब और चमकेगा, और आप भी इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं।
Faq
(1) स्वदेश दर्शन 2.0 योजना क्या है?
स्वदेश दर्शन 2.0 योजना पर्यटन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है, जो थीम आधारित पर्यटन सर्किटों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों का विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना है
(2) स्वदेश दर्शन ट्रेन कैसे बुक करें?
स्वदेश दर्शन ट्रेन बुकिंग के लिए IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट www.irctc.co.in या मोबाइल ऐप पर जाएं। “टूरिस्ट ट्रेन” सेक्शन में स्वदेश दर्शन ट्रेन चुनें, यात्रा तिथि, गंतव्य और सीट उपलब्धता देखें, फिर ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से बुकिंग करें
(3) स्वदेश दर्शन योजना कब शुरू की गई थी?
स्वदेश दर्शन योजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य थीम आधारित पर्यटन सर्किटों का एकीकृत विकास करना और देश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।
(4) स्वदेश दर्शन योजना के तहत कितनी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है?
स्वदेश दर्शन योजना के तहत 2014-19 तक 76 परियोजनाओं को 5,292.57 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 34 परियोजनाओं को 791.25 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति मिली है।
(5) किस मंत्रालय द्वारा स्वदेश दर्शन योजना को लांच किया गया है?
स्वदेश दर्शन योजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा लांच किया गया है। यह मंत्रालय थीम आधारित पर्यटन सर्किटों के विकास और पर्यटन अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है।